‘अब उनका पार्टी से कोई संबंध नहीं’, जज बनीं आरती साठे पर मचा सियासी घमासान, BJP से आया जवाब

बॉम्बे हाई कोर्ट में पूर्व बीजेपी प्रवक्ता आरती साठे की बतौर न्यायाधीश नियुक्ति को लेकर सियासी विवाद जारी है. कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और टीएमसी नेताओं ने न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं.वहीं बीजेपी ने भी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि साठे अब पार्टी से पूरी तरह अलग हो चुकी हैं.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल पूर्व बीजेपी प्रवक्ता रही आरती साठे को बॉम्बे हाई कोर्ट में बतौर न्यायाधीश नियुक्ति किया गया. इस पर कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि अगर किसी पूर्व प्रवक्ता को जज बना दिया जाए, तो आम जनता को निष्पक्ष न्याय कैसे मिलेगा? उन्होंने पूछा कि क्या संविधान की रक्षा इस तरह संभव है.

वहीं एनसीपी (SP) विधायक रोहित पवार ने भी आरती साठे की नियुक्ति पर आपत्ति जताई और फरवरी 2023 में महाराष्ट्र बीजेपी द्वारा जारी प्रवक्ता नियुक्ति पत्र का स्क्रीनशॉट साझा किया. उनका दावा है कि यह नियुक्ति न्यायपालिका की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है.

अब उनका बीजेपी से कोई संबंध नहीं- बीजेपी

बीजेपी की ओर से राज्य के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए कहा कि साठे ने डेढ़ साल पहले पार्टी से इस्तीफा दे दिया था और अब उनका भाजपा से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और रोहित पवार को कोलेजियम के निर्णय पर उंगली उठाने का कोई अधिकार नहीं है. उपाध्ये ने यह भी जोड़ा कि यह पूरी तरह राजनीतिक हमला है जो न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचा सकता है.

कोलेजियम की बैठक और TMC की चिंता

राज्यसभा सांसद और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रवक्ता साकेत गोखले ने भी इस मुद्दे को उठाया और कोलेजियम के फैसले पर सवाल किए. गोखले ने बताया कि 28 जुलाई 2025 को हुई सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की बैठक में अजित भगवानत्राव कडेहंकर, आरती अरुण साठे और सुशील मनोहर घोडेस्वर को बंबई हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी. गोखले ने कहा कि न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है, खासकर जब किसी की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही हो.

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